प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष

आज ना जाने समय ने एक गहरी सोच में लाकर रख दिया था , जो १६ साल में ज़ख़्म अप्रत्यक्ष रूप से मिले वो ज़्यादा गहरे थे उन ज़ख़्मों की तुलना में जो जीवन में प्रत्यक्ष रूप से मिले हैं। इसका अर्थ ये भी होसकता है कि प्रत्यक्ष रूप में मिलने वाले आघात उन जीवात्मा […]

A feverish thought-2

2 years back I came into this corporate world. A world where humans are machines with an emotional touch in their existence. I never thought of corporate as a selfish, mean crazy ex girlfriend -( Pun intended 😉 ) but now I can fairly summarise the notion about this world as; as long as corporate […]